जुर्म का आलीशान महल और कैमरों का पहरा: बढ़नी क्षेत्र में फैला नशे का जाल, 9 दिनों में एसएसबी का दूसरा बड़ा प्रहार!
सिद्धार्थनगर • 29 Jul 2026, 11:05 pm

बढ़नी/सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल सरहद पर बसे ढेबरुआ थाना क्षेत्र की बढ़नी पुलिस चौकी इलाके में नशे का काला कारोबार जिस तेजी से पांव पसार चुका है, उसका जीता-जागता केंद्र इसी चौकी क्षेत्र का गजेहड़ी उर्फ मधवानगर गांव बना हुआ है। सीमा पर मुस्तैद 50वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की सजगता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महज 9 दिन पहले, बीते 20 जुलाई को भी जवानों ने 9.23 ग्राम स्मैक के साथ दो युवकों को दबोचकर सलाखों के पीछे भेजा था, और अब एक बार फिर एसएसबी व पुलिस की संयुक्त टीम ने बुधवार को 15.85 ग्राम स्मैक के साथ एक और बड़े तस्कर को धर दबोचा। हालांकि, कागजों में दर्ज इन गिरफ्तारियों के पीछे बढ़नी चौकी क्षेत्र में फैले उस खौफनाक सिंडिकेट की जमीनी हकीकत छिपी है, जिसने अनगिनत युवाओं का भविष्य अंधकार में धकेल दिया है। ताजा मामले में गिरफ्तार अभियुक्त प्रदीप कुमार लंबे समय से इसी गजेहड़ी उर्फ मधवानगर इलाके में स्मैक की खरीद-फरोख्त का नेटवर्क चला रहा था। नशे की इस काली कमाई के दम पर उसने न सिर्फ एक आलीशान मकान खड़ा कर लिया, बल्कि खाकी की आहट और अनजान आवाजाही पर नजर रखने के लिए घर के चारों तरफ हाई-टेक सीसीटीवी कैमरे भी फिट करवा रखे थे। इस गिरोह का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि इन्होंने जल्द अमीर बनने का लालच देकर नाबालिग बच्चों और राह भटके युवाओं को स्मैक की डिलीवरी के काम में धकेल दिया था। यद्यपि आरोपी ने कबूला है कि वह यह माल बलरामपुर के बेला चौराहे से लाता था, लेकिन अब असली सवाल जांच की दिशा पर खड़ा होता है—क्या बढ़नी चौकी पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां महज मोहरों को जेल भेजकर इतिश्री कर लेंगी या फिर मधवानगर में काली कमाई से बने उस आलीशान महल, कॉल डिटेल्स और बलरामपुर के मुख्य सप्लायरों की गहराई से निष्पक्ष जांच होगी? अगर शासन-प्रशासन ईमानदारी से इस पूरे बैकवर्ड-फॉरवर्ड नेक्सस की परतें उघेड़े, तो बढ़नी से लेकर बलरामपुर और नेपाल बॉर्डर तक फैले कई और बड़े 'सफेदपोश' सरगनाओं के नकाब उतरना तय है।









