शोहरतगढ़ (302) के सियासी समर में नया मोड़, बढ़नी के टीसम गाँव निवासी नौशाद आलम बने आजाद समाज पार्टी के विधानसभा प्रभारी
सिद्धार्थनगर • 31 Jul 2026, 3:15 pm

शोहरतगढ़ (सिद्धार्थनगर) | उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले की 302 शोहरतगढ़ विधानसभा सीट पर आगामी 2027 के चुनावों को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट चंद्रशेखर आजाद के निर्देश एवं प्रदेश कमेटी की संस्तुति पर विकास खंड बढ़नी के ग्राम टीसम निवासी जमीनी नेता नौशाद आलम को शोहरतगढ़ विधानसभा का प्रभारी नियुक्त किया गया है।
अपनी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति के कारण यह क्षेत्र बेहद खास माना जाता है। बुद्ध परिपथ और राष्ट्रीय राजमार्ग 730 (NH-730) पर स्थित होने के साथ-साथ यह इलाका भारत-नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटा हुआ है तथा गोंडा-गोरखपुर रेल मार्ग से जुड़ा है। ऐतिहासिक रूप से राजा शोहरत सिंह और राजा शिवपति सिंह की विकासवादी सोच और 'शिवपति स्नातकोत्तर महाविद्यालय' जैसी शैक्षणिक धरोहरों को समेटे इस क्षेत्र की लगभग 95% आबादी ग्रामीण है। इसके चलते नेपाल सीमा से लगे इस अंचल में बाढ़ नियंत्रण, कृषि, रोजगार, स्वास्थ्य और बुनियादी विकास आज भी प्रमुख चुनावी मुद्दे बने हुए हैं।
डुमरियागंज लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली इस विधानसभा सीट का राजनीतिक सफर भी बेहद दिलचस्प रहा है। वर्ष 2008 के नए परिसीमन के तहत अस्तित्व में आई 'विधानसभा सीट संख्या 302' पर मतदाताओं ने हमेशा बदलाव को प्राथमिकता दी है। 2012 में समाजवादी पार्टी के लालमुन्नी सिंह, 2017 में भाजपा-अपना दल (एस) गठबंधन के अमर सिंह चौधरी और 2022 में फिर अपना दल (एस) के विनय वर्मा यहाँ से विधायक चुने गए। हालांकि, 2022 के चुनाव में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने 13,000 से अधिक वोट हासिल कर पहली बार अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई थी।
इस चुनावी पृष्ठभूमि के बीच, टीसम गाँव के साधारण परिवार से निकलकर धरातल पर संघर्ष करने वाले नौशाद आलम की नियुक्ति को पार्टी का एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। नौशाद आलम लंबे समय से शोहरतगढ़ के लगभग हर गाँव, टोले और मजरों में लगातार सघन जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। किसी दफ्तर या वातानुकूलित कमरे के बजाय ग्रामीण पगडंडियों पर आम जनता के सुख-दुख में शरीक रहने की उनकी शैली ने उन्हें क्षेत्र में बेहद लोकप्रिय बना दिया है।
शोहरतगढ़ के सामाजिक ताने-बाने की बात करें तो यहाँ दलित (अनुसूचित जाति), मुस्लिम और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC - कुर्मी, यादव, मौर्य, पासी आदि) के मतदाताओं की संख्या चुनाव परिणाम तय करने में निर्णायक भूमिका निभाती है। नौशाद आलम की कमान मिलने के बाद से क्षेत्र में दलित-मुस्लिम-पिछड़ा (PDA) गठजोड़ बेहद मजबूत होता दिख रहा है। सांसद चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में एएसपी द्वारा लोकतांत्रिक व संवैधानिक तरीके से उठाई जा रही शोषितों और वंचितों के हक की आवाज का सीधा प्रभाव स्थानीय युवाओं और ग्रामीण जनता पर पड़ रहा है।
बढ़नी के टीसम गाँव के लाल नौशाद आलम को मिली इस बड़ी जिम्मेदारी के बाद शोहरतगढ़ (302) में आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह का माहौल है। जनसंपर्क के दौरान आम जनता के बीच उनके प्रति दिखा उत्साह यह साफ संकेत दे रहा है कि इस बार शोहरतगढ़ की जनता पारंपरिक राजनीतिक दलों को किनारे कर एक नए और अपने बीच के जमीनी विकल्प पर भरोसा जताने का मन बना रही है।









