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सावधान: बच्चों की 'ड्राइंग प्रतियोगिता' के बहाने पैरेंट्स से लाखों की ठगी; बढ़नी में पकड़ा गया गिरोह, ऐसे रचते हैं जालसाज पूरा स्कैम

सिद्धार्थनगर19 Jul 2026, 11:13 pm

सावधान: बच्चों की 'ड्राइंग प्रतियोगिता' के बहाने पैरेंट्स से लाखों की ठगी; बढ़नी में पकड़ा गया गिरोह, ऐसे रचते हैं जालसाज पूरा स्कैम
सिद्धार्थनगर। जिले के नगर पंचायत बढ़नी बाजार के पचपेड़वा रोड स्थित एक निजी मैरिज हॉल में रविवार को उस समय भारी हंगामा हो गया, जब बच्चों को परीक्षा का सर्टिफिकेट और पुरस्कार देने के नाम पर बुलाकर एक कथित इंश्योरेंस कंपनी के बाईस कर्मियों ने अभिभावकों से लाखों रुपये ऐंठ लिए। हालांकि, अभिभावकों के कड़े विरोध और डिवाइन विजडम एकेडमी के मैनेजिंग डायरेक्टर मोहम्मद जमील सिद्दीकी के त्वरित एक्शन व हस्तक्षेप के चलते सभी बाईस वर्कर्स को मौके पर ही पकड़ लिया गया, जिसके बाद वे ठगे गए पैसे वापस करने पर मजबूर हुए। इस पूरे मामले में एक सोची-समझी साजिश यानी स्कैम का खुलासा हुआ है, जिसका जाल स्कूलों के जरिए बुना जा रहा था। पकड़े गए आरोपियों के पास से जो कथित लेटर हेड और दस्तावेज बरामद हुए हैं, उससे इस पूरे स्कैम का हैरान करने वाला तरीका सामने आया है। ये जालसाज जेनराली सेंट्रल लाइफ इंश्योरेंस और ड्रीमलाइन फिनवेस्ट प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर स्कूलों के प्रिंसिपल को एक अनुमति पत्र सौंपते हैं, जिसमें स्कूल के बच्चों के लिए कलर माई ड्रीम कॉन्टेस्ट यानी ड्राइंग कॉम्पिटिशन या इंटेलिजेंस टेस्ट आयोजित करने की अनुमति मांगी जाती है। इस पत्र में वादा किया जाता है कि सभी भाग लेने वाले बच्चों को मुफ्त सर्टिफिकेट और प्राइज दिया जाएगा, लेकिन चालाकी यह की जाती है कि ड्राइंग शीट पर बच्चों से उनका नाम, पैरेंट्स का नाम और मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से भरवाकर उनका पर्सनल डेटा चुरा लिया जाता है। इसके बाद इसी डेटा का इस्तेमाल कर अभिभावकों के मोबाइल पर मैसेज या कॉल कर सूचित किया जाता है कि उनके बच्चे ने प्रतियोगिता में स्थान पाया है और प्राइज व सर्टिफिकेट लेने के लिए वे मैरिज हॉल पहुंचें। मैरिज हॉल में पुरस्कार वितरण के मुख्य कार्यक्रम के बजाय वहां पहले से मौजूद बाईस सदस्यीय टीम, जिसमें करीब पंद्रह महिलाएं शामिल थीं, ने अभिभावकों को घेर लिया। कंपनी के लेटर के मुताबिक, वे अभिभावकों को फ्री फाइनेंशियल प्लानिंग सेशन के नाम पर बुलाते हैं और फिर बच्चों के सुनहरे भविष्य का वास्ता देकर लाखों रुपये के इंश्योरेंस प्लान के फॉर्म भरवा लेते हैं। बढ़नी में भी ऐसा ही हुआ और आरोपियों ने एक क्यूआर कोड उपलब्ध कराया, जिस पर झांसे में आकर कई अभिभावकों ने लाखों रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। इसी दौरान एक पीड़ित अभिभावक विष्णु कुमार गुप्ता के खाते से एक लाख साठ हजार रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। कार्यक्रम के दौरान कुछ अभिभावकों को आयोजकों की गतिविधियों पर शक हुआ, जिसके बाद उन्होंने तुरंत डिवाइन विजडम एकेडमी के मैनेजमेंट से संपर्क किया। स्कूल प्रबंधन ने साफ शब्दों में कहा कि उनकी तरफ से ऐसे किसी भी इंश्योरेंस कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जा रहा है। सच्चाई सामने आते ही मैरिज हॉल में हंगामा शुरू हो गया। खुद को फंसता देख टीम में शामिल युवतियां गाड़ियों में बैठकर भागने की कोशिश करने लगीं, लेकिन सजग अभिभावकों ने उन्हें रोक लिया। मामले की जानकारी मिलते ही एकेडमी के मैनेजिंग डायरेक्टर मोहम्मद जमील सिद्दीकी तुरंत पूरे एक्शन में आए और सीधे मौके पर पहुंचे। उन्होंने कार्यक्रम आयोजकों को आड़े हाथों लेते हुए कड़ी पूछताछ की। एमडी के इस त्वरित हस्तक्षेप और कड़े रुख के आगे पकड़े गए कथित कंपनी के वर्कर्स निरुत्तर हो गए और पूरा फ्रॉड खुलकर सामने आ गया। एमडी मोहम्मद जमील सिद्दीकी और स्थानीय प्रबुद्ध लोगों के कड़े हस्तक्षेप के बाद आरोपी पूरी तरह बैकफुट पर आ गए। मौके पर ही दोनों पक्षों के बीच लिखित समझौता हुआ, जिसके आधार पर पीड़ित विष्णु कुमार गुप्ता के एक लाख साठ हजार रुपये में से एक लाख तीस हजार रुपये तुरंत वापस कराए गए। बाकी के तीस हजार रुपये एक सप्ताह के भीतर वापस करने का लिखित वादा किया गया। इसके अलावा अन्य जिन अभिभावकों के पैसे फंसे थे, उन्हें भी वर्कर्स के हेड ने जल्द वापस करने का आश्वासन दिया है। इस संबंध में डिवाइन विजडम एकेडमी के मैनेजिंग डायरेक्टर मोहम्मद जमील सिद्दीकी ने बताया कि कुछ लोगों ने स्कूल में एक एग्जाम कराया था और कहा था कि वे बच्चों को पुरस्कार देंगे, लेकिन पुरस्कार के बहाने जिस तरह अभिभावकों को गुमराह कर पैसे वसूले गए, उसकी स्कूल प्रशासन को कोई जानकारी नहीं थी और वे ऐसे किसी भी भ्रामक कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते हैं। वहीं चौकी प्रभारी वीरेंद्र यादव ने बताया कि मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई थी और उपस्थित संभ्रांत लोगों के हस्तक्षेप से शिकायतकर्ता एवं कार्यक्रम आयोजकों के बीच रुपये वापस करने के नाम पर सहमति बन गई है, बाकी अन्य तथ्यों की जांच की जा रही है। यह मामला पूरे समाज और जनता के लिए एक बड़ी चेतावनी और अलर्ट है, क्योंकि बच्चों की मासूमियत और उनके पुरस्कार के लालच का इस्तेमाल करके पैरेंट्स की जेब साफ करने के लिए यह पूरा स्कैम रचा जा रहा है। जालसाजों के इस झांसे से बचने के लिए जनता को जागरूक होना बेहद जरूरी है। यदि आपके बच्चे के नाम पर किसी बाहरी स्थान जैसे मैरिज हॉल या होटल में पुरस्कार लेने के लिए बुलाया जाए, तो सबसे पहले स्कूल के प्रिंसिपल या आधिकारिक नंबर पर कॉल करके पुष्टि करें। इसके साथ ही स्कूलों में होने वाली किसी भी ऐसी प्रतियोगिता की ड्राइंग शीट या फॉर्म पर अपना मुख्य मोबाइल नंबर या बैंक से जुड़ा नंबर साझा करने से बचें। फ्री सेशन या बच्चों के भविष्य के नाम पर भावनात्मक दबाव में आकर किसी भी अपरिचित क्यूआर कोड पर ऑनलाइन पैसे तत्काल ट्रांसफर बिल्कुल न करें, क्योंकि आईआरडीएआई के नियमों के अनुसार कोई भी वैध इंश्योरेंस कंपनी इस तरह दबाव बनाकर मैरिज हॉल में नकद या तुरंत ऑनलाइन ट्रांसफर नहीं करवाती है। यदि कहीं भी ऐसी संदिग्ध गतिविधि दिखे, तो सजग रहें और तुरंत स्कूल प्रबंधन या साइबर सेल को सूचित करें ताकि ऐसे बड़े स्कैम से बचा जा सके।

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