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जर्जर तारों के संजाल से नगर से देहात तक सांसत में जिंदगियां, एबीसी केबल लगाने और क्षमता वृद्धि की उठी पुरजोर मांग

सिद्धार्थनगर3 Sept 2026, 11:04 pm

सिद्धार्थनगर (OK Talk India): जनपद समेत पूरे पूर्वांचल में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (डिस्कॉम) द्वारा निर्धारित दरों व फिक्स्ड चार्ज के साथ नियमित विद्युत आपूर्ति के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। क्षेत्र के अधिकांश उपभोक्ता समय पर बिजली बिलों का भुगतान भी कर रहे हैं, लेकिन धरातल पर विद्युत आपूर्ति का बुनियादी ढांचा पूरी तरह चरमराया हुआ है। ग्रामीण अंचलों में जहां बांस-बल्लियों के सहारे दौड़ती लाइनें कई-कई दिनों तक आपूर्ति ठप रखती हैं, वहीं नगरीय व कस्बाई क्षेत्रों में दशकों पुराने जंग लगे पोल, क्षमता से अधिक लोड झेलते ट्रांसफार्मर और नीचे लटकते नंगे तार व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं। हल्की हवा या बूंदाबांदी होते ही घंटों आपूर्ति ठप हो जाना अब एक सामान्य नियम बन चुका है। नेपाल सीमा से सटी नगर पंचायत बढ़नी और उसके सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में हालात विशेष रूप से विस्फोटक और चिंताजनक बने हुए हैं। कस्बे के मुख्य बाजारों, संकरी गलियों व घनी बस्तियों के ठीक ऊपर से हाईटेंशन और एलटी लाइन के जर्जर तार झूल रहे हैं। मौसम में तनिक भी बदलाव आते ही स्पार्किंग, तार टूटने और फेज उड़ने का सिलसिला शुरू हो जाता है। स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का कहना है कि वे न केवल अघोषित बिजली कटौती व लो-वोल्टेज का दंश झेल रहे हैं, बल्कि हर पल करंट और तार टूटने के खौफ में जीने को मजबूर हैं। घनी आबादी वाले इन बाजारों में कभी भी कोई बड़ा तार टूटकर गिरना भीषण अग्निकांड या व्यापक जनहानि का कारण बन सकता है। समस्या की सबसे बड़ी जड़ यह है कि बीते वर्षों में नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की खपत कई गुना बढ़ चुकी है। आधुनिक जीवनशैली के चलते आज ज्यादातर घरों और दुकानों में एसी, कूलर, बड़े फ्रिज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग तेजी से बढ़ा है, लेकिन विद्युत विभाग का ढांचा दशकों पुराने ढर्रे पर ही टिका है। जिन स्थानों पर वर्षों पहले कम आबादी के हिसाब से ट्रांसफार्मर लगाए गए थे, उनकी क्षमता वृद्धि (अपग्रेडेशन) आज तक नहीं की गई। ओवरलोडिंग के कारण ट्रांसफार्मर लगातार हांफ रहे हैं और आए दिन धू-धू कर जल जाते हैं। स्थानीय नागरिकों की मांग है कि बिजली की बढ़ी हुई खपत के अनुरूप ट्रांसफार्मरों की क्षमता तुरंत बढ़ाई जाए और घनी आबादी व संकरे रास्तों के बीच लटके जोखिम भरे ट्रांसफार्मरों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जाए। बढ़नी नगर के बाजारों में जहां सैकड़ों दुकानें और मकान एक-दूसरे से सटे हैं, वहां लटकते नंगे तार किसी बड़े खतरे की तरह सिर पर मंडरा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग शायद किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद ही फाइलों से बजट बाहर निकल सकेगा। लगातार हो रही शिकायतों के बावजूद ठोस धरातलीय कार्य न होना सीधे तौर पर जनता की सुरक्षा के प्रति संवेदनहीनता को दर्शाता है। विभागीय उदासीनता का आलम यह है कि जब भी जनप्रतिनिधि या आम उपभोक्ता इस समस्या को लेकर आवाज उठाते हैं, तो उन्हें केवल एक रटा-रटाया औपचारिक जवाब थमा दिया जाता है। अधिकारियों का तर्क रहता है कि क्षेत्र के सभी जर्जर तारों, पुराने खंभों और ओवरलोड ट्रांसफार्मरों का एस्टीमेट बनाकर मुख्यालय भेजा जा चुका है और बजट की प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति मिलते ही कायाकल्प कराया जाएगा। बड़ा सवाल यह है कि विभागीय फाइलों और पत्राचार की कछुआ चाल के बीच क्या जनता की जान की कोई कीमत नहीं है? वर्षों से बजट के नाम पर टाले जा रहे इस कार्य का खामियाजा सीधे तौर पर आम उपभोक्ताओं को अपनी सुरक्षा दांव पर लगाकर भुगतना पड़ रहा है। बढ़नी नगर व ग्रामीण क्षेत्र के निवासियों, प्रबुद्ध वर्ग और व्यापार मंडल ने शासन, जिला प्रशासन एवं विद्युत विभाग के उच्चाधिकारियों से पुरजोर मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए प्राथमिकता के आधार पर विशेष बजट जारी किया जाए। घनी बस्तियों, बाजारों और संवेदनशील ग्रामीण इलाकों से गुजर रहे खुले जर्जर तारों को तत्काल हटाकर सुरक्षित एरियल बंच्ड (एबीसी) केबल लगाई जाए, बढ़े हुए लोड के हिसाब से नए ट्रांसफार्मर स्थापित कर उनकी क्षमता बढ़ाई जाए तथा खतरनाक स्थानों से ट्रांसफार्मरों को सुरक्षित जगह शिफ्ट किया जाए, ताकि भविष्य में हादसों से बचा जा सके और उपभोक्ताओं को निर्बाध व सुरक्षित बिजली मिल सके।

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